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लोक साहित्य के अध्ययन की समस्याएं

  लोक साहित्य के अध्ययन की समस्याएं बताइये। लोक साहित्य के अध्ययन की समस्याएं ·         लोक साहित्य का अध्ययन एक खर्चीला कार्य है जिसके लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता होती है।   ·         ऐसे लोगों की खोज करना जो जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रश्नमाला की तैयारी कर सकें चुनौती भरा कार्य   है। ·         अध्ययन सामग्री का पृथक-पृथक संग्रह करना चुनौती भरा काम है   ·         लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति के अध्ययन हेतु बनाई गई टीम के सदस्यों का कुशल होना आवश्यक है। ·         लोकगीतों और साहित्य को कैसे प्राप्त किया जाए यह भी एक चुनौती भरा कार्य है ·         अध्ययनकर्ता का स्वयं को क्षेत्र विशेष के वातावरण में ढाल पाना भी एक चुनौती है ·         ऐसे व्यक्ति को खोज निकालना जिसे लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य की पूर्ण और सही ज...

भारत की श्रेष्ठता- मैथिलीशरण गुप्त

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मनुष्यता- मैथिलीशरण गुप्त

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  मनुष्यता पाठ प्रवेश प्रकृति के अन्य प्राणियों की तुलना में मनुष्य में सोचने की शक्ति अधिक होती है। वह अपने ही नहीं दूसरों के   सुख – दुःख का भी ख्याल रखता है   और दूसरों के लिए कुछ करने में समर्थ होता है। जानवर जब चरागाह में जाते हैं तो केवल अपने लिए चर कर आते हैं , परन्तु मनुष्य ऐसा नहीं है। वह जो कुछ भी कमाता है , जो कुछ भी बनाता  है , वह दूसरों के लिए भी करता है और दूसरों की सहायता से भी करता है। प्रस्तुत पाठ का कवि अपनों के सुख – दुःख की चिंता करने वालों को मनुष्य तो मानता है परन्तु यह मानने को तैयार नहीं है कि उन मनुष्यों में मनुष्यता के सारे गुण होते हैं। कवि केवल उन मनुष्यों को महान मानता है जो अपनों के सुख – दुःख से पहले दूसरों की चिंता करते हैं। वह मनुष्यों में ऐसे गुण चाहता है जिसके कारण कोई भी मनुष्य इस मृत्युलोक से चले जाने के बाद भी सदियों तक दूसरों की यादों में रहता है अर्थात वह मृत्यु के बाद भी अमर रहता है। आखिर क्या है वे गुण ? यह इस पाठ में जानेंगे – मनुष्यता पाठ सार इस कविता में कवि मनुष्यता का सही अर्थ समझाने का प्रयास कर रहा है। पहले भाग...