लोक,लोकवार्ता और लोक संस्कृति
लोक-- लोक एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ' संसार ' । जैन ग्रन्थ और हिन्दू साहित्य में इसका प्रयोग होता है। जैन ब्रह्माण्ड विज्ञान के अनुसार इस ब्रह्माण्ड में तीन लोक है। लोक मनुष्य समाज का वह वर्ग है जो आभिजात्य संस्कार , शास्त्रीयता और पांडित्य की चेतना अथवा अहंकार से शून्य है और जो एक परंपरा के प्रवाह में जीवित रहता है। लोककथा या लोकवार्ता (folklore) -- किसी मानव-समूह की उस साझी अभिव्यक्ति को कहते हैं जो कथाओं , कहावतों , चुटकुलों आदि अनेक रूपों में अभिव्यक्त होता है। इसके अलावा लोकवार्ता में उस मानव-समूह के लोककलाएँ , लोकवास्तु , लोकगीत , लोक-उत्सव आदि सब कुछ आ जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ निश्चित कथानक रूढ़ियों और शैलियों में ढली लोककथाओं के अनेक संस्करण , उसके नित्य नई प्रवृत्तियों और चरितों से युक्त होकर विकसित होने के प्रमाण है। एक ही कथा विभिन्न संदर्भों और अंचलों में बदलकर अनेक रूप ग्रहण करती हैं।
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